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पठ्ठे बापूराव प्रतिष्ठान पुरस्कार घोषित: पांडुरंग घोटकर, प्रमिला लोदगेकर और आप्पासाहेब उगले होंगे सम्मानित

Pandurang Ghotkar Guruji
पांडुरंग घोटकर गुरुजी

लोक कला क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान के लिए तीनों मान्यवरों का होगा सम्मान, 22 फरवरी को वानवड़ी में आयोजित होगा समारोह

हड़पसर, फरवरी (हड़पसर एक्सप्रेस न्यूज नेटवर्क)
पठ्ठे बापूराव प्रतिष्ठान व सांस्कृतिक कला मंडल की ओर से प्रदान किया जानेवाला राज्यस्तरीय  ‘शाहीर पठ्ठे बापूराव पुरस्कार’ वरिष्ठ ढोलकी वादक पांडुरंग घोटकर गुरुजी को घोषित किया गया है।इसके अलावा 'पवला पुरस्कार' मोडनिंब की लावणी नृत्यांगणा प्रमिला लोदगेकर व तमाशा साहित्यिक  ‘बापूसाहेब जिंतीकर पुरस्कार’  जालना के शाहीर आप्पासाहेब उगले को प्रदान किया जानेवाला है। ऐसी जानकारी प्रतिष्ठान के संस्थापक जयप्रकाश वाघमारे व महोत्सव समिति के अध्यक्ष मित्रावरुण झांबरे द्वारा दी गई है।

Pramila Lodgekar
नृत्यांगणा प्रमिला लोदगेकर

इस बारे में अधिक जानकारी देते हुए जयप्रकाश वाघमारे व मित्रावरुण झांबरे ने बताया कि पुरस्कार का यह 27वां वर्ष है। शाहीर पठ्ठे बापूराव पुरस्कार 21 हजार रुपये, पवला और बापूसाहेब जिंतीकर पुरस्कार प्रत्येकी 15  हजार रुपये, सम्मान चिन्ह, शाल व श्रीफल यह पुरस्कार का स्वरूप रहकर पुरस्कार वितरण समारोह रविवार दि. 22 फरवरी को महात्मा फुले सांस्कृतिक भवन, वानवडी में आयोजित किया गया है। इस अवसर पर शाम 5 बजे से रात 10 बजे तक लावणी महोत्सव का आयोजन किया गया है। 

Appasaheb Ugale
शाहीर आप्पासाहेब उगले

लोक कला के प्रचार-प्रसार और प्रसार के लिए यह कार्यक्रम नि:शुल्क है। महिलाओं के लिए आरक्षित स्थान की व्यवस्था की गई है।मोडनिंब, सणसवाडी व महाराष्ट्र से आनेवाले विभिन्न संगीत पार्टियों के कलाकार लावनी महोत्सव में अपनी कला का प्रदर्शन करेंगे। ऐसी जानकारी  प्रतिष्ठान के उपाध्यक्ष डाॅ. शंतनु जगदाले, रेश्मा परितेकर, संदीप घुले, बापू जगताप, कृष्णा ढेरंगे व रवींद्र चव्हाण ने दी है।

यह पुरस्कार उन व्यक्तियों को दिया जाता है जिन्होंने लोक कला के क्षेत्र में योगदान दिया है।
पठ्ठे बापूराव पुरस्कार प्राप्त पांडुरंग घोटकर ने हजारो कलाकारों को संगीत में साथ दी है।वह कलाकारों की तीन पीढ़ियों को लोक कला में प्रशिक्षण दे रहे हैं।प्रतिष्ठित शाहीर पठ्ठे बापूराव पुरस्कार से शकुंतला नगरकर, छाया खुटेगावकर, संजीवनी मुले, रघुवीर खेडकर, लक्ष्मीबाई तांबे, सरस्वतीबाई कोल्हापूरकर ऐसे पुरानी पीढ़ी के नामचीन कलाकारों को सम्मानित किया गया है।

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