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भारत को सेमीकंडक्टर आत्मनिर्भरता की आवश्यकता - प्रो. डॉ. मंगेश कराड

MIT-ADT

लोनी कालभोर, फरवरी (हड़पसर एक्सप्रेस न्यूज नेटवर्क
अभी भारत अपने 94 प्रतिशत सेमीकंडक्टर चिप्स अन्य देशों से आयात करता है।यही कारण है कि देश अभी भी सेमीकंडक्टर तकनीक पर निर्भर है। यदि सेमीकंडक्टर क्षेत्र में एकाधिकार रखनेवाले देश चिप्स की आपूर्ति बंद कर दें तो भविष्य में भारत को गंभीर संकट का सामना करना पड़ सकता है। इसी कारण भारत सरकार ने प्रधानमंत्री के नेतृत्व मेंसेमीकंडक्टर मिशनकी घोषणा की है। इसके अंतर्गत देश में सेमीकंडक्टर कंपनियों की स्थापना हेतु 76 हजार करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है। परिणामस्वरूप इस क्षेत्र में निवेश बढ़कर 1,60,000 करोड़ रुपये तक पहुंचने की संभावना है तथा विद्यार्थियों के लिए रोजगार के व्यापक अवसर उपलब्ध होंगे। यह विचार एमआईटी एडीटी विश्वविद्यालय के कार्याध्यक्ष एवं प्र-कुलपति प्रो. डॉ. मंगेश कराड ने व्यक्त किए।

एमआईटी आर्ट, डिज़ाइन एवं टेक्नोलॉजी विश्वविद्यालय के स्कूल ऑफ इंजीनियरिंग एंड साइंसेज द्वारा आयोजितसेमीकंडक्टर प्रौद्योगिकीविषयक राष्ट्रीय संगोष्ठी तथा सेमीकंडक्टर प्रौद्योगिकी केसेंटर ऑफ एक्सीलेंस (सीओई)’ एवं विद्यार्थियों केसेमीकंडक्टर क्लब (सेमी-सी)’ के उद्घाटन समारोह को संबोधित करते हुए वे बोल रहे थे। यह कार्यक्रम स्व.उर्मिला ताई कराड सभागार में आयोजित किया गया।

Dr.Mangesh Karad MIT-ADT

इस अवसर पर भारत इलेक्ट्रॉनिक्स लिमिटेड (बीईएल) के कार्यकारी निदेशक सूर्यनारायण मूर्ति, नेट्रा एक्सीलरेटर फाउंडेशन के संस्थापक एवं मुख्य कार्यकारी अधिकारी विवेक पवार, वीएसएलआई सोसाइटी बेंगलुरु के अध्यक्ष डॉ. सत्य गुप्ता, कुलगुरु प्रो. डॉ. राजेश एस., प्र-कुलगुरु डॉ. रामचंद्र पुजेरी, डॉ. मोहित दुबे, अधिष्ठाता डॉ. सुदर्शन सानप, डॉ. विरेंद्र शेटे तथा कार्यक्रम समन्वयक डॉ. रमेश माली सहित देश भर से उद्योग जगत के गणमान्य व्यक्ति, विशेषज्ञ, खोजकर्ता एवं विद्यार्थी बड़ी संख्या में  उपस्थित थे। 

इस अवसर पर सूर्यनारायण मूर्ति ने कहा कि वर्तमान में भारत में सेमीकंडक्टर निर्माण हेतु आवश्यक अत्याधुनिक उपकरण, प्रक्रियागत क्षमता तथा विशेषज्ञ मानव संसाधन की उपलब्धता अन्य अग्रणी देशों की तुलना में पर्याप्त नहीं है। परिणामस्वरूप भारत अब भी जापान, दक्षिण कोरिया, ताइवान, अमेरिका और चीन जैसे देशों पर निर्भर है। ये देश वैश्विक सेमीकंडक्टर आपूर्ति श्रृंखला में अग्रणी हैं तथा उच्च गुणवत्ता वाली सेमीकंडक्टर चिप्स का उत्पादन मुख्यतः वहीं होता है। वर्तमान में ताइवान का इस क्षेत्र में लगभग 65 प्रतिशत उत्पादन पर नियंत्रण है। अतः भारत इलेक्ट्रॉनिक्स भी सरकार के सहयोग से इस निर्भरता को कम करने का प्रयास कर रहा है। 

प्रास्ताविक में डॉ. पुजेरी ने विश्वविद्यालय की अनुसंधान-आधारित शिक्षा नीति की जानकारी दी। कुलगुरु डॉ. राजेश एस. ने उन्नत प्रौद्योगिकी शिक्षा एवं उद्योग सहयोग के माध्यम से वैश्विक स्तर के अभियंताओं के निर्माण के विश्वविद्यालय के उद्देश्य पर प्रकाश डाला। 

कार्यक्रम का शुभारंभ विश्वशांति प्रार्थना से हुआ तथा समापनपसायदानसे किया गया। डॉ. सुदर्शन सानप ने आभार व्यक्त किया, जबकि प्रो. स्नेहा वाघटकर ने कार्यक्रम का संचालन किया।

पुणे बनेगा सेमीकंडक्टर हबविवेक पवार 
नेट्रा एक्सीलरेटर फाउंडेशन के संस्थापक विवेक पवार ने कहा कि वर्तमान में विद्यार्थियों का रुझान मुख्यतः सॉफ्टवेयर अभियांत्रिकी की ओर अधिक है। किंतु कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) के बढ़ते प्रभाव को देखते हुए अब विद्यार्थियों को मूल कोर शाखाओं की ओर भी ध्यान देना चाहिए। वर्तमान निवेश प्रवृत्ति को देखते हुए सेमीकंडक्टर प्रौद्योगिकी भारत का भविष्य सिद्ध हो सकती है। इसके लिए आवश्यक पारिस्थितिकी तंत्र विकसित करना आवश्यक है। यदि ऐसा किया गया तो बेंगलुरु और चेन्नई के पश्चात पुणे भी सेमीकंडक्टर हब के रूप में उभर सकता है। इससे युवाओं को इस क्षेत्र में व्यापक रोजगार अवसर प्राप्त होंगे।

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