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भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद-राष्ट्रीय अंगूर अनुसंधान केंद्र, पुणे ने अपना 25 वां स्थापना दिवस मनाया

पुणे, जनवरी (ह.ए. प्रतिनिधि)

भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (भाकृअनुप) -राष्ट्रीय अंगूर अनुसंधान केंद्र, पुणे ने 18 जनवरी, 2021 को अपना 25वां स्थापना दिवस मनाया। समारोह की अध्यक्षता मुख्य अतिथि डॉ ए.  के. सिंह, उप-महानिदेशक (बागवानी), भाकृअनुप, नई दिल्ली ने की तथा डॉ. एच. पी. सिंह, पूर्व उप-महानिदेशक (बागवानी), महाराष्ट्र राज्य कृषि विश्वविद्यालयों के कुलपति; सहायक महानिदेशक (बागवानी), संस्थानों के पूर्व तथा वर्त्तमान निदेशकों; अंगूर उत्पादकों; उत्पादक  संघ के प्रतिनिधियों, अंगूर निर्यातकों के प्रतिनिधि; नामित प्रयोगशालाओं के प्रतिनिधियों और भाकृअनुप मुख्यालय एवं पुणे स्थित संस्थानों के वरिष्ठ अधिकारियों ने इस कार्यक्रम की शोभा बढ़ाई। कार्यक्रम की शुरुआत भाकृअनुप गीत से हुई। 
डॉ. आर. जी. सोमकुवर, निदेशक (कार्यवाहक), भाकृअनुप -राष्ट्रीय अंगूर अनुसंधान केंद्र ने सभी प्रतिनिधियों का स्वागत किया और एक वर्ष के दौरान संस्थान की उपलब्धियों के बारे में जानकारी दी। डॉ. वसंत दगड़े, प्रोग्रेसिव अंगूर उत्पादक और मेडिकल प्रक्टिशनर, ने अंगूर की खेती के बारे में अपने अनुभव साझा किए और भाकृअनुप- रा अं अनु केंद्र द्वारा प्रदान किए गए तकनीकी मार्गदर्शन और संस्थान के क्षेत्र दिवस पहल की सराहना की। श्री पी. सुरेश बाबू, महाप्रबंधक, जियो-केएम लैब प्राइवेट लिमिटेड, मुंबई ने 2003 से यूरोपीय संघ को भारतीय अंगूर के निर्यात में संस्थान के  योगदान की सराहना की। दो अंगूर उत्पादकों, श्री गौस मोहम्मद शेख, बोरमनी, सोलापुर और श्री राहुल रसाल, परनेर, अहमदनगर को महाराष्ट्र में अंगूर की खेती में उनके उत्कृष्ट योगदान के लिए सम्मानित किया गया। 
अपनी टिप्पणी में, इन अंगूर उत्पादकों ने कोविड-19 महामारी के दौरान उत्पादकों को संस्थान द्वारा दिए गए मार्गदर्शन और समर्थन तथा डेल्टा टी ऐप की सराहना की, जिसने कीट और रोग नियंत्रण के लिए प्रभावी छिड़काव के संचालन में सही मदद दी। इस अवसर के दौरान, विभिन्न श्रेणियों के कर्मचारियों को संस्थान पुरस्कार प्रदान किए गए। माननीय मुख्य अतिथि द्वारा अंगूर में आधारीय छंटाई नामक एक तकनीकी बुलेटिन जारी किया गया। मुख्य अतिथि डॉ ए.के. सिंह, उप-महानिदेशक (बागवानी), भाकृअनुप, नई दिल्ली ने अपने संबोधन में अंगूर उद्योग पर जलवायु परिवर्तन के प्रभाव पर जोर दिया और सुझाव दिया कि संस्थान को उपलब्ध तकनीकी विकल्पों की पुनः खोज करनी चाहिए, उत्पादन लागत को कम करने और उत्पादकों की आय को दुगुना करने के लिए नई पहल विकसित की जानी चाहिए, खेती की विभिन्न आवश्यकताओं को हल करने के लिए एक कदम समाधान पर कार्य करना चाहिए। वैश्विक प्रतिस्पर्धात्मकता में वृद्धि के कारण, उन्होंने कई जैविक और अजैविक तनावों के प्रतिरोध के लिए कम समय में किस्म और मूलवृन्त विकसित करने के लिए प्रजनन प्रक्रिया को गति देने के लिए नए आनुवंशिक संसाधनों को एकत्र करने और विशिष्ट लक्षणों हेतु जांच करने का सुझाव दिया। 
उन्होंने उत्पादकों के बीच नए कृषि कानूनों के बारे में जागरूकता फैलाने का भी सुझाव दिया। डॉ. अनुराधा उपाध्याय, प्रधान वैज्ञानिक ने औपचारिक धन्यवाद प्रस्ताव दिया। अंगूर की सतत खेती के लिए  वैज्ञानिक-उद्योग  तालमेल पर एक तकनीकी सत्र भी आयोजित किया गया, जिसमें शोधकर्ता; उत्पादकों और उद्योग कर्मियों ने विभिन्न पहलुओं पर विचार-विमर्श किये।

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