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26 जनवरी और गणतंत्र दिवस

श्री सत्येंद्र सिंह
रामेश्वरी-सदन, सप्तगिरि सोसायटी, 
जांभुलवाडी रोड, आंबेगांव खुर्द, पुणे-411046
हमारे देश में 26 जनवरी को गणतंत्र दिवस राष्ट्रीय पर्व के रूप में बड़ी धूमधाम से मनाया जाता है। नई दिल्ली में महामहिम राष्ट्रपति महोदय द्वारा राष्ट्रीय ध्वज फहराया जाता है, माननीय प्रधानमंत्री द्वारा राजपथ पर इंडिया गेट के पास बने अमर जवान ज्योति पर शहीदों को श्रद्धांजलि अर्पित की जाती है और दो मिनट का मौन रखा जाता है। तत्पश्चात् इंडिया गेट से राष्ट्रपति भवन तक भव्य परेड का आयोजन होता है, जिसमें तीनों भारतीय सेनाओं यथा जल, थल, वायु सेना के कीर्तिमान, राष्ट्रीय कैडेट कोर, स्कूल के बच्चों और प्रांतों की झांकियां रहती हैं। इस परेड में शामिल होना बड़े गर्व और   सम्मान  की बात होती है। सभी प्रांतों की सरकारें, सभी संस्थान, विश्वविद्यालय, महाविद्यालय, कॉलेजों, स्कूलों में बड़े उत्साह के साथ गणतंत्र दिवस मनाया जाता है। सभी क्षेत्रों की प्रतिभाओं का सम्मान किया जाता है। सामूहिक रूप से खड़े होकर राष्ट्र गान गाया जाता है। भारतीय संविधान के अनुसार चलने की बात दोहराई जाती है। देश की आजादी को बनाए रखने की प्रतिज्ञा दोहराई जाती है। यह याद किया जाता है कि हमारा देश हजारों देशभक्तों के बलिदान के बाद अँग्रेजों की  दासता से मुक्त हुआ, हजारों माताओं की गोद सूनी हो गई थी, हजारों बहन-बेटियों की मांग का सिंदूर मिट गया था। महान बलिदानों और कुर्बानियों के बाद देश स्वतंत्र हुआ और 26 जनवरी 1950 को गणतंत्र बन गया।
संविधान निर्माण और 26 जनवरी के बारे में आज हम कुछ बातें याद करते हैं। द्वितीय विश्व युद्ध के बाद जुलाई 1945 में ब्रटेन की नई सरकार ने भारत संबंधी अपनी नई नीति की घोषणा की तथा भारत की स्वतंत्रता का हल निकालने के लिए ब्रिटिश प्रधानमंत्री एटली ने कैबिनेट से तीन मंत्रियों- लॉरेंस, एप्स और एलेग्जेंडर का एक दल भारत भेजा, जिसे कैबिनेट मिशन के नाम से जाना जाता है। इसी कैबिनेट मिशन की सिफारिश पर दिसंबर 1946 में संविधान सभा का गठन किया गया। इस सभा में पूरे देश से 389 सदस्य थे, जिनमें सभी प्रांतों के विद्वान प्रतिनिधि और रियासतों के प्रतिनिधि, अनुसूचित वर्ग के 30 से ज्यादा सदस्य भी शामिल थे। इस संविधान सभा के अस्थायी अध्यक्ष सच्चिदानंद  सिन्हा थे पर बाद में डॉ. राजेंद्र प्रसाद को अध्यक्ष निर्वाचित   किया गया। हरेंद्र कुमार मुखर्जी और टी. टी. कृष्णमाचारी को उपाध्यक्ष  चुना गया।
इस सभा में बॉम्बे से बालचंद्र महेश्वर गुप्ते, डॉ. भीमराव आंबेडकर, यूसुफ एल्बन डिसूजा, कन्हैयालाल नानाभाई देसाई, केशवराव जेधें, खंडूभाई कसनजी देसाई, बाल गंगाधर खेर, मीनू मसानी, कन्हैयालाल माणिकलाल मुंशी, नरहर विष्णु गाडगिल, एस.निजलिंगप्पा, एस.लालकृष्ण पाटिल, रामचंद्र मनोहर नलावड़े, आर.आर.दिवाकर, शंकरराव देव, गणेश वासुदेव मावलंकर, वल्लभभाई पटेल, अब्दुल कादर मोपम्मद शेख, आफताब अहमद खान थे। बॉम्बे राज्य से विनायकराव बालशंकर वैध, बी. एन. मुनवली, गोकुलभाई भट्ट, जीवराज नारायण मेहता, गोपालदास ए. देसाई, प्राणलाल ठाकुरलाल मुंशी, बी.एच.खरडेकर, रतनप्पा भरमप्पा कुम्भार थे। संयुक्त प्रांत से करीब 62 सदस्य थे। अन्य सभी प्रांतों के तो थे ही, उनका नाम देना यहां संभव नहीं है।
संविधान बनाने के लिए 22 समितियां बनाई गई थीं, जैसे प्रारूप समिति (अध्यक्ष डॉ. भीमराव आंबेडकर), केंद्रीय ऊर्जा समिति (अध्यक्ष जवाहरलाल नेहरू), केंद्रीय घटना समिति (अध्यक्ष जवाहरलाल नेहरू), प्रांतीय घटना समिति (अध्यक्ष वल्लभभाई पटेल), मूलभूत अधिकार, अल्पसंख्यक, आदिवासी और अपवर्जित क्षेत्रों की सलाहकार समिति (अध्यक्ष वल्लभभाई पटेल), प्रक्रिया समिति के नियम समिति (अध्यक्ष डॉ. राजेंद्र प्रसाद), राज्य समिति (अध्यक्ष जवाहरलाल नेहरू), सुकाणु समिति (अध्यक्ष डॉ. राजेंद्र प्रसाद), राष्ट्रीय ध्वज समिति (अध्यक्ष गणेश वासुदेव मावलंकर), सभा समिति (अध्यक्ष पट्टाभि सीतारमैया), भाषा समिति (अध्यक्ष मोटूरि सत्यनारायण), व्यवसाय समिति के आदेश (अध्यक्ष कन्हैयालाल माणिकलाल मुंशी). मूलभूत अधिकार उप समिति (अध्यक्ष जे. बी. कृपलानी), अल्पसंख्यक उपसमिति (अध्यक्ष हरेंद्र कुमार मुखर्जी), उत्तर पूर्व सीमांत आदिवासी क्षेत्र उपसमिति (अध्यक्ष  गोपीनाथ बोरदोलोई), शेष क्षेत्र (आसाम को छोड़कर) उपसमिति (अध्यक्ष  ठक्कर बापा)।
इन समितियों में प्रारूप समिति सबसे अधिक महत्वपूर्ण थी, जिसके अध्यक्ष डॉ. भीमराम आंबेडकर थे और कन्हैयालाल मुंशी, मोहम्मद सादुल्लाह, अल्लादि कृष्णस्वामी अय्यर, गोपालस्वामी आयंगर, एन.माधव राव, टी.टी.कृष्णमाचारी सदस्य थे। प्रारूप समिति को पूरा संविधान लिखने का काम सौंपा गया था। संविधान सभा की 6 दिसंबर 1946 को पहली बैठक सच्चिदानंद सिन्हा की अध्यक्षता में हुई, जिसे सर्वप्रथम जे. बी. कृपलानी ने संबोधित किया। मुस्लिम लीग ने बैठक का बहिष्कार किया। 11 दिसंबर को डॉ. राजेंद्र प्रसाद को संविधान सभा का अध्यक्ष निर्वाचित किया गया। हरेंद्र कुमार मुखर्जी को उपाध्यक्ष निर्वाचित किया गया। 15 अगस्त 1947 को भारत को स्वतंत्रता मिली। 26 नवंबर 1949 को संविधान सभा ने भारतीय संविधान को स्वीकार किया, इसीलिए हर वर्ष 26 नवंबर को संविधान दिवस मनाया जाता है। संविधान सभा द्वारा 6 दिसंबर 1946 को कार्य आरंभ किया गया और 24 जनवरी 1950 को समाप्त किया। कुल मिलाकर सभा ने 2 वर्ष, 11 माह, 18 दिन कार्य किया और 114 बैठकों का आयोजन किया। इन बैठकों में प्रेस और जनता को भाग लेने की स्वतंत्रता थी। 26 जनवरी 1950 को संपूर्ण भारतीय संविधान को भारत सरकार अधिनियम 1935 के स्थान पर लागू कर दिया गया और भारत को लोकतांत्रिक गणराज्य बनाते हुए लोकतांत्रिक सरकार प्रणाली को लागू किया गया। संविधान को 26 जनवरी के दिन लागू करने और गणतंत्र दिवस के रूप में मनाने का कारण यह है कि जनवरी 1930 को भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस ने एक अधिवेशन में भारत को पूर्ण स्वतंत्रता देने के निर्णय की घोषणा की थी और उसी दिन से स्वतंत्रता प्राप्त होने तक 26 जनवरी को स्वतंत्रता दिवस के रूप में स्वीकार किया और, 26 जनवरी का महत्व बनाए रखने के लिए संविधान निर्मात्री सभा द्वारा स्वीकृत संविधान में भारत के गणतंत्र स्वरूप को मान्यता प्रदान की गई। अतः अब 15 अगस्त 1947 को स्वतंत्रता दिवस और 26 जनवरी को गणतंत्र दिवस मनाया जाता है।

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