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हड़पसर को कचरा डिपो नगरी नहीं होने देंगे : नगरसेवक योगेश ससाणे

हड़पसर, जनवरी (ह.ए. प्रतिनिधि
)
उरुलीदेवाची, फुरसुंगी, हड़पसर इंडस्ट्रीयल इस्टेट, रामटेकडी इंडस्ट्रीयल इस्टेट में पहले से ही कचरा डिपो हैं फिर भी मुंढवा-केशवनगर में नया कचरा प्रकल्प होने जा रहा है! पुणे शहर का कूड़ा-कचरा डालने के लिए सिर्फ हमारे हड़पसर को ही क्यों चुना जाता है? हड़पसर पुणे शहर का प्रवेश द्वार व उद्योगनगरी के रूप में पहचाना जाता है, क्या अब उसकी नयी पहचान कचरा डिपो हड़पसरनगरी करनी है? पूरे पुणे शहर का कूड़ा-कचरा इकलौते हड़पसर को ही निस्तारण करना है? हड़पसर में भी इंसान रहते हैं, हड़पसर की जनता अब यह सहन नहीं करेगी। किसी भी कचरा ट्रक को कचरा प्रकल्प में प्रवेश नहीं करने का निर्णय लिया गया है। हड़पसरनगरी को कचरा डिपो नगरी की नयी पहचान न होने देने का हमने संकल्प लिया है। यह आवाज नगरसेवक योगेश ससाणे ने उठाई है।
नगरसेवक योगेश ससाणे ने हड़पसर के सभी पत्रकारों को रामटेकडी इंडस्ट्रीयल इस्टेट स्थित कचरा प्रकल्प का मुआइना करने के लिए बुलाया था तब उन्होंने पूरे कूड़े-कचरा प्रकल्प की परिस्थिति से अवगत कराया। 
पत्रकारों से बातचीत करते हुए आगे नगरसेवक योगेश ससाणे ने बताया कि कचरा डिपो के विरोध में आंदोलन करते हुए हड़पसरवासियों की ओर से कूड़ा-कचरा महानगरपालिका सत्ताधिकारियों और महानगर पालिका अधिकारियों व सोसाइटियों में ले जाकर डालने का कार्यक्रम शुरू किया जाएगा, इसलिए महानगरपालिका अधिकारी  व सत्ताधारियों ने प्रकल्प के बारे में तुरंत आवश्यक कार्यवाही करने हेतु कदम उठाने चाहिए। इस हेतु प्रत्येक प्रभाग में कचरा निस्तारण प्रक्रिया का निर्माण किया जाना चाहिए। हमें कचरा प्रकल्प है, ऐसा बताया गया और वास्तव में यहां ओपन डंपिंग करते हुए हजारों मैट्रिक टन कचरा इकट्ठा किया गया है, जिसके कारण यहां निर्माण होनेवाली बदबू से उद्योग क्षेत्र के अनेक उद्योग यहां से जा रहे हैं। इस्टेट के मजदूर और इस परिसर में रहनेवाले नागरिकों के साथ-साथ स्कूल व महाविद्यालय के छात्रों का स्वास्थ्य खतरे में आ गया है। उरुलीदेवाची व फुरसुंगी के नागरिकों ने ओपन डंपिंग का विरोध करने के बाद वहां की कचरा गाड़ियों द्वारा रामटेकडी के इस प्रकल्प में कचरा डाला जा रहा है। इस कचरे में  90 प्रतिशत प्लास्टिक रहने कारण उसका खाद्य नहीं हो सकता है। खेत में डालने पर खेत बंजर हो रहे हैं। वहीं, बारिश के मौसम में कचरा डिपो से लगातार पानी निकलने से क्षेत्र के स्वच्छ जल स्रोत बदबूदार होते जा रहे  हैं। 
गीले और सूखे कचरे को अलग करने के लिए शहरवासियों को प्रत्येक घर के लिए दो बाल्टी का वितरण किया गया है फिर भी कूड़ा-कचरा मिश्रित करके ही दिया जाता है। कूड़े-कचरे में सबसे ज्यादा मात्रा प्लास्टिक की होती है। कपड़े और कूड़ा सड़ते हैं, लेकिन प्लास्टिक को गलने में 350 साल लगते हैं, यह बात विशेषज्ञों द्वारा बार-बार बताई जा रही है। 
महानगरपालिका का एक स्वतंत्र विभाग प्लास्टिक के उपयोगकर्ताओं पर काम कर रहा है, लेकिन नागरिकों ने एक सवाल उठाया है कि इतनी बड़ी मात्रा में प्लास्टिक कचरा आता कहां से है, क्या महानगरपालिका के अधिकारी निष्क्रिय हो गए हैं?

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