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ऐतिहासिक तारीख है 16 अप्रैल



-श्री सत्येंद्र सिंह
सेवानिवृत्त वरिष्ठ राजभाषा अधिकारी
सप्तगिरी सोसायटी, जांभुलवाडी रोड, आंबेगांव खुर्द, पुणे-411046
मोबाइल : 9922993647
16 अप्रैल 1853 की तो बात ही निराली है। उस दिन शनिवार का दिन था और एशिया की पहली रेल लाइन का उद्घाटन होना था। बड़ी धूमधाम से एक भव्य समारोह का आयोजन किया गया। 16 अप्रैल का दिन भारत के इतिहास में विशेष स्थान रखता है।
16 अप्रैल से यानी 168 वर्ष पहले इसी दिन सन् 1853 में भारत की पहली रेलगाड़ी चलाकर एक नया इतिहास लिखा गया था जब बोरी बंदर स्टेशन (आज छत्रपति शिवाजी महाराज टर्मिनस स्टेशन) से 34 किलो मीटर ठाणे तक भाप इंजन से रेलगाड़ी चलाई गई। इस रेलगाड़ी में 400 व्यक्तियों ने यात्रा की।
वास्तव में भारत में रेलगाड़ी चलाने का विचार तत्कालीन वॉयसराय लॉर्ड डलहौजी का था। इस लाइन के निर्माण के लिए उन्होंने जी.आई.पी. रेलवे, जिसका पुराना नाम द बॉम्बे ग्रेट ईस्टर्न रेलवे था, का गठन किया और इसको अमली जामा पहनाने के लिए एक बॉम्बे कमेटी बनाई। इस कमेटी के चेयरमैन थे मि. जे.पी. विलिघभाय (गवर्नमेंट के चीफ सेक्रेटरी), सेक्रेटरी थे मि. ए.एस.आर्यटन (मेसर्स आर्यटन वॉकर के सॉलीसिटर), साधारण सदस्य थे - मि. आर. डब्ल्यू. क्रॉफर्ड ( मेसर्स रेमिंगटन एंड कंपनी के डिप्टी चेयरमैन), कर्नल जी.आर.जेरविस (चीफ इंजीनियर व मेंबर मिलिटरी बोर्ड), करसेटजी कावसजी (जस्टिस ऑफ द पीस), एस. एस. डिकेन्सन, बोमनजी होरमुसजी वाडिया (जस्टिस ऑफ द पीस), जे. स्मिथ (मेसर्स निकोल एंड कंपनी), जे. एच. जैक्सन, वीकाजी मेहरजी, एच.एच.ग्लास (कलेक्टर ऑफ कस्टम), जगन्नाथजी शंकरसेट (जस्टिस  ऑफ द पीस), कैप्टन जे. स्वानसन (प्रेसीडेंसी पे मास्टर), करसेटजी जमशेदजी जीजीभाय (जस्टिस ऑफ द पीस) आर.स्पूनर (डिप्टी कलेक्टर ऑफ कस्टम), दादाभाय पेस्टनजी वाडिया (जस्टिस ऑफ द पीस), गिलवर्ट फैरी (मेसर्स मैकविकर, बर्न एंड कंपनी) और ट्रस्टी थे पी. डब्ल्यू. लेगिट (सीनियर मजिस्ट्रेट ऑफ पुलिस), जीजीभाय दादाभाय मूघाना (मर्चेंट), बी.रेमिंगटन (मेसर्स रेमिंगटन एंड कंपनी)।
हालांकि इससे पूर्व भारत में छोटे-छोटे रूप में रेलवे का प्रवेश हो चुका था। मद्रास में 1837 में लाल पहाड़ियों से चिंताद्रीपेत पुल तक रेलगाड़ी चली। सन् 1845 में गोदावरी नदी पर बांध निर्माण के लिए सामग्री ढोने के लिए रेलवे का इस्तेमाल हुआ। 8 मई 1845 को मद्रास रेलवे की स्थापना हुई। उसके बाद उसी वर्ष ईस्ट इंडिया रेलवे की स्थापना हुई। अगस्त 1849 में ग्रेट इंडियन प्रायद्वीपीय रेलवे (जीआईपीआर) की स्थापना की गई। 22 दिसंबर 1851 को रुड़की से सोलानी नदी पर पुल बनाने के लिए इंजीनियर प्रोवेटी कॉटन द्वारा रेलगाड़ी चलाकर सामग्री ढोई गई। यह पुल गंग नहर के लिए बनाया गया था। 1852 में मद्रास गारंटी रेलवे कंपनी की स्थापना की गई।
लेकिन 16 अप्रैल 1853 की तो बात ही निराली है। उस दिन शनिवार का दिन था और एशिया की पहली रेल लाइन का उद्घाटन होना था। बड़ी धूमधाम से एक भव्य समारोह का आयोजन किया गया। इस अवसर पर समारोह को केवल अंग्रेजों ने ही संबोधित किया था, जिनमें मेजर       स्वानसन, सीनिटय डायरेक्यर ऑफ कंपनी, जो अध्यक्ष के रूप मे थे। सर विलियम यार्डले, सर हेनरी लीके, मि.बर्कले तत्कालीन चीफ इंजीनियर, कैप्टन क्राफर्ड, मि. फैवेल  रेल लाइन डालने वाले ठेकेदार। संबोधन करने वालों में कोई भारतीय नहीं था। इस अवसर पर एक बेहतरीन अंग्रेजी की कविता भी पढ़ी गई। इस कविता को 18 अप्रैल 1853 के बॉम्बे टाइम्स और जनरल ऑफ कॉमर्स में प्रकाशित भी किया   गया था। पूरे समारोह के बारे में 4 जून 1853 के द इलेस्ट्रेटेड लंदन न्टूज़ में बहुत सराहना की गई    थी, इसलिए 16 अप्रैल का दिन भारत के इतिहास में विशेष स्थान रखता है।
16 अप्रैल 2021 को सजाई गई छत्रपति शिवाजी महाराज टर्मिनस इमारत

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